पाणी री बड़ी अजब है कहाणी।

बताओ दुनिया में कित्तो है पाणी॥

जमीं माथै थार, पहाड़, पठार दिखै।

पण जमीं माथै सै सूं घणो है पाणी॥

सगळा सोचो सगळां नै समझाओ।

इयै धरती रो अनमोल है पाणी॥

जीव-जानवर-मिनख जात नै।

जद तिस लागै जद पीवां पाणी॥

पाणी आपां रै जीवन रो आधार है।

फिजूल कदै नां ढोळणो पाणी॥

च्यारुंमेर पाणी खातर क्यों है हाको।

सोचो, इक-इक बून्द बचाओ पाणी॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुईनुद्दीन कोहरी ‘नाचीज’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
जुड़्योड़ा विसै