पून रै फटकारै सागै

पाणी लहर-लहर लहरावै

ऊंचो उठ-उठ सरवर पाणी

डूंगर पगल्या धोवै।

कांठळ रै बांठा नै

पाणी हरस-हरस हरसावै

रूखां री काया नै पाणी

हरियो करतो जावै।

डेडरिया अर मच्छा राणी

पाणी छपक-छपक छपकावै

सगळै जीवां नै पाणी

लहरां खेलातो रैवे।

काळा-काळा बादळिया

पाणी बरस-बरस बरसावै

डूंगर सूं नाळा चालै पाणी

सरवर भरतो जावै।

आभै में चन्दो चमकै

पाणी निरख-निरख निरखावै

चांदी जैड़ौ चमकै पाणी

चन्दै सूं मिलणो चावै।

नीं बरसै जद मेह तो

पाणी तरस-तरस तरसावै

सगळा जीव जिनावर पाणी

खातर तरसता रैवै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महेन्द्र सिंह मील ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
जुड़्योड़ा विसै