निङ्गह्वा! छिङ्गल्यू! क्वेइह्वा!

संकड़ा मारग, गै’रा जंगळ लील वाळी ढाळ

आज कठाक है आपणौ हल्लाण

सीधा वठै, जठै ऊई परबत रा पगल्या

हां सा, परबत रै नैड़ै, वठै इज परबत री छियां में

लै’रावै लाल धजा मस्त पवन में

जठै श्यान सूं, आनबान सूं मुगत गिगन में।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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