बादळ बरसै आभो गरजै, काळी कांठळ बीजळ पळकै।

नभ निरखै करसा मन हरखै, अमरत बरसै धरती सरसै

बिरखा-बीनण मुळक सरस-गागर छळकाई रे…

करसा हळ ले खेतां जावै, गोरड़ियां गीतड़ला गावै

छोकरियां ढूल्यां परणावै, टाबरिया घरकोल्या ठावै

मगरै टऊकै मोर मेह-आवौ, सोर मचाई रे ऽऽऽ

बिरखा आई रे ऽऽऽ

डैर-खेत पालर जळ भरिया, दुखियां रा दिनड़ा सब टळिया

खुशियों सूं हिवड़ा घण भरिया तीजों तणा त्यौहार, सुधरिया

‘करलियो’ जुगुनू बण धर शोभा, निरखण आई रेऽऽऽ

बिरखा आई रेऽऽऽ

बीजळ री पायल पग पहरी ओढ़ूी चूनड़ सत-रंगिये री

गाज नगारां-ताळ घुरै री, नभ आंगळियै घूमर घेरी

झटकै टूटौ हार छोंट-मोती छितराई रे ऽऽऽ

बिरखा आई रे ऽऽऽ

नभ बाबुल री बिरखा कंवरी परणी अम्बर आंगण चंवरी

नभ-बेटी बीनण बणी धर री धीवड़ पीहर किताक दिन री!

देतौ धीवड़ सीख, गगन आंख्यों बरसाई रेऽऽऽ

बिरखा आई रेऽऽऽ

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्यामसुन्दर ‘श्रीपत’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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