नुंवै जुग रा नुंवा लोगां

आओ कीं नुंवो चौळको करां

और नीं तो सीधै नै उळटो करां

सावळ नैं कावळ करां—

बूढ़ळी बसंत पंचमी नै दुहागां

नुंवी-नकोर नाग-पंचमी पुजावां

नागां नै पूजां-सांपां नै दूध पावां

नागां नै जुग-देवता मान

सिर-आंख्यां बैठावां,

अबै अैई भविस है आपारां

इयां नै सौ-सौ शीश नवावां,

राष्ट्र रा प्रतीक है अै।

‘फण’ नै राष्ट्र-चिह्न बणावां

अै बेजां सगती धारी है

अे अणूता चमत्कारी है

अे छिण-छिण बदळै चोळा

गिनीजबुकी रचावै घोटाळा

अै एफिल टावर नै झटक सकै

ऊंदरा सूं लेय’र डायनासोर तक गटक सकै।

आभै तक इयां री सोच है

पताळ ताईं पों’च है

अै बाम्ब्यां में नईं

अबै बंगला में रै’वै

अेयर कंडीशन्ड भवनां में पळै

पुष्पक-विमान पर उडै

आज रा नाग दूध नहीं

मिनख रो असली रगत पीवै

तन नैं नई, मन नै डसै

किणी कालबेलियै सूं नहीं फसै,

इयां रै कटियोड़ै रो नहीं है कोई मन्तर

सै धर्‌यां रै’जावै

सै सगत्यां आं सामी झुकी है

धरती इयां रै फणां टिकी है

इसौ नागपास चलावै

खुद राम फंसजावै,

काळियो नाग इयां रा जस गावै

सेसनाग भी माथो झुकावै।

इयां री आख्यां में है सनीस्चर

आं सांमी लुळै सास्त्र-सस्त्र

उणनै प्रभु भी बचा पावै,

अै है सरब सगती धारी

समूचै धन पर कुंडली मारी—

अै स्वारथ रंग राचै

अै सोनै री पूंगी नाचै

इयां री चाल सूं राज भी धूजै

सै पंडा-पुजारी आनै पूजै,

अै बारै सूं है लचीला

पण मांय है गंठगठीला।

इसी ठौड़ कठै, जठै अै नहीं जलमै

राजनीति में फटाफट पनपै

अै संसद-सचिवालय में मिल जावै।

न्यायालय-देवालय में घुस जावै

कानून पर कुंडली मार सिमट जावै,

समाचारां माथै चढ़ बळखावै

कलमां पर बैठ’र फुफकारै

इयां नै इसा मन्तर पढ़णा आवै’क

हर धरमवाळा नै अै भरमावै

अै सेसनाग है अवतार है

इया रै सैंकडू फण है।

तक्षक रा जाया है, इयां नै

इन्दर रो अभय वर है।

इयां रा जुदां-जुदां दळ है

इयां रा न्यारा-न्यारा छळ है

इया रा कैई रूप-रंग है

इया रा अणगिणत ढंग है,

इयां री कैई-कैई जाता है

इयां री घणी गै’री घातां है।

अै भगवान नै भी छळै

सदीव पूजा पर ही पळै,

नसल परजीवी है

अै दो नहीं, सौ-जीभी है,

चेतो, अै इसो जै’र फैलावै

इमरत कठै नीं रह जावैला—

अे नागां रो जन्मेजय यज्ञ रचा सी

चुण-चुण जन्मेजय जळासी

अै इसौ नाग-जुग चला सी

आखी धरती नै नाग लोग बणासी

दूजां सै देवां नै बिसरावो

इयां ‘बांडियां बीरा’ नै लडावो

इयां रा घर-घर जस-गीत गावो—

सै मिल अेक साथ उच्चारो—

इण धोळा नागां नै नमस्कार

इण सभ्य नागां नै नमस्कार

हाथ-माथा जोड़ नमस्कार

नाक रगड़-रगड़ नमस्कार

अबै म्हारी बात थे मानो

इण बोदी बसंत-पंचमी नै त्यागो

नुंवी-नवेली नाग पंचमी मनाओ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लक्ष्मीनारायण रंगा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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