वास्तविकता पर कवितावां

कविता26

नागां रो जन्मेजय यज्ञ

लक्ष्मीनारायण रंगा

झूंपड़ो

कानसिंह भाटी

लोगां रो चरित्तर

मोहन मण्डेला

नाचण

रविन्द्रनाथ टैगोर

न कच्छो न नाड़ो

महावीर जोशी

पतियारौ

कानसिंह भाटी

कुण देखै

ज्ञान भारती

हुवणै रो अैसास

वासु आचार्य

पुन्न

मोहन आलोक

लाखीणा घोड़ा

ब्रजमोहन सपूत

घोटालां री कमी नहीं

प्रमेश्वर प्रसाद कुमावत

बैठ्यो म्हारो गांव

कुंदन सिंह 'सजल'

भानमती रो पीटारो

दीनदयाल ‘कुन्दन’

सुणो भाईड़ो

शंभु ‘सरल’

पैलां अर अबै

मदन गोपाल लढ़ा

दोरो अर सबसूं दोरो

जेठानंद पंवार

साधु री माया

कपिलदेव आर्य

चीणी चाळा काटगी

भंवरलाल महरिया 'भंवरो'

अध्यक्षता

राणुसिंह राजपुरोहित

आदमी

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

सरकारी साण्ड

रमेशचन्द्र शर्मा ‘इन्दु’

बगत

बस्तीमल सोलंकी भीम

कुण नै व्यथा कैवां

कुंदन सिंह 'सजल'

कवयित्री को ओळमो

बिहारी शरण पारीक

कोई ठोड़ कोनी

शीन काफ़ पारीक