ठेठ किनारा सूं वै रोवै है

कठै गया सगळा पुसब

म्हैं किकर बतावूं

अठा रा बाग-बगीचा तो

मरतोड़ा अर सूखोड़ा है

म्हैं मौत नै भी वांवा हां

हरेक नवी डरपीली करतब

राकस री तिरस नै तेजी दै

म्हैं बिचारवा री हिम्मत नीं करूं

के अै हाडका काल

पनप सकेला

अै हार

अैंठौ खावण वाळां रै

छाती रा बोझा बणिया है

अैड़ा अैंठोड़ा पुसबां सूं

बाग बदरंग है

खोज,

तपतै तावड़ै में बरसात री टपटप

हाथी दांत रा बादळां माथै

आभै री चीलां

ऊँची मीनारां

पा’ड़ा में फिरणियां

हाथां री गंध नै सूंघता फिरै है

म्हैं देखी

चार लोकण री चीलां

टकियोड़ी हवेलियां माथै दौड़ी

थें सोचो कांई! अै हाथ फैल्या है

पा’ड़ी फूलां ने बिखेरण सारू

खोज सांच री

बीज बिखेरे है पोसीजै है

भ्रस्टां रौ भ्रस्टाचार

कीड़ां रै ढिगला माथै टिकियोड़ौ

कलपनालोक री मसाणां रै साथै है।

म्हूं जाणूं हूं

अणदेख्यां फूलां रै बारै में

जिका पैमळ परभातै बूंद-बूंद पीवै है

पण अणचाया सरकंडा

बाग बगीचै नै भांग कब्जा में कर लिया है

आदरस धुंधळीज्या है

साच आपणै में घुस'र लुक गयौ है

अर वेदी माथै पसर्‌योड़ा तेल में

दीखण लाग्यो है

ढकियोड़ां हाथ

दरवाजै दस्तक देवै है

म्हां घर सौंप दां

कै आपां सगळां नै घर री जोख

अैड़ो नीं व्है कै

लोखाणी हाथ

तीखी खीली ज्यू आंगळियां

पूरी ताकत सूं दाबै कब्जा सारू

अबै कंवळी बेलां नीचै ही दबै अर पसरै

नारा

खाली मटका ज्यूं घणा बुलंद

बिन मतलब रा खाली खणकता सबद

भीख रौ कटोरौ लियां वरदी पै’र

लंगूरां रौ नगाड़ै माथै नाच

कुण तोड़ सकै है

लगजोग वधतोड़ा घेरा नै वांरा हाथ रगत सूं रंगियोड़ा है

वांरी उसांसा हर वस्तु नै भसम करै है

मौत रै ढिगला रौ इनाम

वांरै सोच नै पोखै है।

म्हैं ओस री नेनकड़ी ठौड़ जोई

कै उणी टैम सूरजमुखी रै पानड़ै

बळबळतै ओळै पड़

म्हारी गळी रै लुकियोड़ा

दरवाजै नै भांग दियौ।

जेरीला कुकुरमुत्ता रै पुसबां माथै

परदेसी देस रा वैरियां

दरिया रै हिरदै रौ मूंगो

इतिहास रौ बिंदु है, ठसाऊ है

वौ आज अर काल री बात केवणियौ है—

आवौ, आपां

भांगा-टूटा रौ घेर बणावां

आपां वांसू किणी रूप में कमतर नीं

वै तौ मौत रा बिणजारा

अक्कल नै लीरांलीर करण आळां रौ घैर है।

आपणां हाथां में

जे ले सकौ तो न्याव लौ

अर हिम्मत व्है तौ

आंधा क्रोध री तलवार

दुस्टी अर पापी रौ नास करै है

सूरज री पळकां

दर काळीकोर पड़ै है

जगत रा अनाथ भाई!

बळौ, भभकौ

अर आपणै दरद रौ इंधण

धरती री काठी कांकड़ सूं खेंच ल्यौ।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : वोल सोइन्का ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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