पीड़ा आळी गांठड़ी

लियां फिरू हूं आज

कित म्हेलूं कित खोलद्यूं

सै के भागमभाग॥

आखर मंडिया पीड़ का

साज्यां पूरा ठाठ।

अबखायां पोथी पढ़ी,

पीड़ा आळा पाठ॥

पीड़ा नीं दो च्यार है,

पीड़ा नीं दस बीस।

पीड़ा पूरो थान है,

पीड़ा नीं कटपीस॥

पीड़ा म्हारी मालकण,

म्हैं पीड़ा रो दास।

बैरण जीवण व्यापारी,

छह रुत बारा मास॥

पीड़ा पळै पड़ौस में,

पीड़ा घर रै बीच।

च्यारूं ओड़ां फैलर्‌यो,

पीड़ा आळो कीच॥

पीड़ा भूखो पेट है,

पीड़ा नागी देह।

पीड़ा सूखो खेत है,

जठै बरस्यो मेह॥

पीड़ा बूढ़ो बाप जी,

बेटी जोध जवान।

पीड़ा शोषण देह रो,

माणस बण्यू हवान॥

जलम्या पैली पेट में,

मारै बाप’र माय।

बै लाडो को पीड़ नित,

कुचर काळजो खाय॥

पीड़ा दानव दायजो,

सुरसा मुंह बणजाय।

पीड़ा लाडो बापड़ी,

तेल छिड़क मरज्याय॥

पीड़ा मोटो मांगतो,

और गरीबी रोग।

टींगर डोलै काम बिन

बात बणावै लोग।

पीड़ा गिरतो मानखो,

साहू बणगा चोर।

छल्लो भ्रष्टाचार को,

ओड़ मिलै नी छोर॥

पीड़ नेता आज रा

रह्या देस नै लूट।

कुरसी सत्ता भोग हित,

मिनखा गैरे फूट॥

पीड़ा बढ़ता लोगड़ा,

घटता जंगल झाड़।

पीड़ा बै गद्दार है,

चरज्यां बण कर बाड़॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महावीर प्रसाद जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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