जेल री कोठरियां में कैद

कित्तौ अजूबौ है फैरूं थारै बाबत सोचणौ

थन्नै प्रीत करण रौ सुख

अपणै मांय बसियोड़ै

दूजोड़ै 'खुद' नै प्रीत करण री दांई है।

थन्नै याद करणौ इण बगत

कितरौ अचंभै आळी बात है

मौत अर जीत री खबरां बिचाळै

अपणी इण काळ-कोठरी में।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : नाजिम हिकमत ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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