ओळूं आवै

आकळ-बाकळ कर देवै हियो

डाफा-चूक करदै जियो।

अचेता प्राण

थारै चितराम में

रम जावै,

आंसूंवां में

रात-दिन डूब जावै।

दिखण लागै

बाजती सहनाई

बंधतौ-छूटतौ हथलेवो

ब्याव रा

बाजता ढोल-थाळी।

बिदाई रो गीत

पाणी सूं पाणी

अेक-मेक होंवता हेत,

बाबल-मां

बहनां-साथणियां सूं

छूटतो नेह।

सेजां री हिलती-डुलती प्रीत

करवट बदळती

तपती पिघळती देह।

चादर माथै पड़ती

लहरां दांईं सिलवटां,

पसीनो छूटतो

सांकळ बणती बावां।

बावळी सी उडीकूं

चातक दांईं आभौ।

जी करै बांथां में बांधल्यूं

सगळी भौम

कदैई तो थूं

आवैला निजरां में।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदनमोहन परिहार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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