वाटे ने घाटे

एक’स् वात

एक'स् दरसाव देखाये

मनकासार नुं मेहल

खेदन मदन थई र्‌‌युं हैं

अनीतिने अंदाई ना

आडीया पाडा

चारेमेर सरी र्‌या हैं।

मनक मनक नुं वैरी बणी

अेक बीजा ना बाबरा फोड़ी र्‌यु है

मरजादा नै संस्कार नो

पुतलो मानवी

सब खुटीये टांगीने

अेकलमुंडीयू थई ग्यू है

आणा नबरा टेम मयं

कूंण कै ने कैने कै

अरे केवा नी हिम्मत करो

तो हाम्बरे कूंण

कैवाय तो मनक नी वस्ती

मण जरा रेवासिया माते

नज़र तो नाखी

अेक वगत तो वगड़ा नुं

जनावर पण हरमाई जाये

वन वगड़ा ना भी

कायदा रे

पण मनक नो कोई

कण कायदों न्हें

आवा कठण टेम मयं

मनक ना जाया थकी

मनकसार नी उम्मीदर राकवी

बेमानी है

पण म्हारा माई बाप

दुनिया उमीद मातेस

कायम है।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच ,
  • सिरजक : दीपिका दीक्षित ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकाशन
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