थारौ आंचळ जद

सिंझ्या री अरदास सूं

भर्‌योड़ौ व्हैला।

थारा हजार हाथ जद

औलाद नै आसीसां देवैला

मां!

उण दिन सिरजूंला म्हैं वे आखर

जका कसूंमल बुगचै मांय

कंकु रा छांटां देय’र धर्‌योड़ा है।

थारै मिंदर री जोत जद

धीमै-धीमै काटैला

म्हारी जूण रौ अंधारौ।

मां!

म्हारौ अेकलौ मन जद थाक जावैला

इण संसार रै अणूंतै अपजस सूं।

घबराय’र म्हैं थारौ इज नांव रटूंला

उण दिन सिरजूलां म्हैं वे आखर।

उण रात

जद थारै आंचळ रौ उजास खोजूंला

तारां छाई रात में

उण रात म्हैं सिरजूंला वै आखर।

स्रोत
  • पोथी : कऊ री झाळ ,
  • सिरजक : प्रमिला शंकर ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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