लोकतंत्र रा ऊंखळां में

पोलतंत्र रा मूसळां सूं

वापड़ी रूड़ी रूपाळी

जिनगाणी नै खांड-खांड,

लूण-मिरच पीसवा री

खरड़ कर दीनी

और खोद्‌यां जा खाडा

निकळ्यां जा धूळो?

लोग-बाग न्हाळता जा

गाबड़्यां हलावता जा

फूसर-फूसर करता जा

पुलिस रो सिपाही देखै

सिनेमा री बात करवा लाग जावै

बो गयो नै पाछो बो पैलां आळो ठाठ।

रोवतै टाबर रै चूंकणी रो इन्तजाम

बळी-जळी बाटी रो ठिकाणो हमाम

ना’रां रा पींजरा

मूंडा फाड़्यां करै सलाम

आज हाजरी कालै

आपणै तो यूं ही चालै

अंवळी घट्यां रै पाणी सब ठामड़ा

अेंठवाड़ा कर दीना।

स्रोत
  • पोथी : मरूवाणी ,
  • सिरजक : नन्दलाल दया ‘अपूर्ण’ ,
  • संपादक : रावत सारस्वत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान भासा प्रचार सभा, जयपुर ,
  • संस्करण : 08, अगस्त
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