लकड़ियां

जणा बदळ जासी कुर्‌सियां मांय

तद म्हानै लागसी

अन्तपन्त एक दुनियां बदल्योड़ी।

लोग बांनै बरतै

अनै भूल जावै, वांनै

ईज कायदो है दुनिया रो

अर कवियां कुर्‌सियां री बेबसी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हेमन्त शेष ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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