कोई सागै कितणी

दोस्ती यारी निभाल्यो

कितणा आपणा सा

सम्बन्ध बणाल्यो

भाईचारा का झंडा

गाड़द्यो

बगत बेबगत चाहे

थारी जान लगाद्‌यो

सो क्यूं चोखो ही करो हो

ओढी में थे आडा आवो

कदे कोई शिकायत को मोको

कोनी देवो

ब्यापार भी सागै करो तो

बी में भी आईना की तरह

पारदर्‌शिता राखो

इतणी होणै कै पछै

जै थांरै सै एक भी

गळती होगी

तो सारो खायो-पीयो

बार'नै काढ लेसी

अब तेरा भजू कै मेरा भजू

साब को

नाम ही दुनिया है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बनवारीलाल अग्रवाल ‘स्नेही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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