नित नुवां

कानून कायदा

अठै कीतराई बणै

पण उण रौ असर

निगै नीं आवै

कांई बात है?

कांईं ठा?

सब रै दिमाग में

घुसियौडो है वैम

कै बजार बिकती चीज

कद पर्दायत बण जावैली?

काईं ठा?

काईं ठा?

कद गिटका दे

कोई मोटी माछळी

नैनकड़ी नै

किण मिस, किण समचै?

किण पळ, किण भांत?

कांईं ठा?

बोले

खाली अर भर्‌या

नाड़ा नाडकी

कांईं ठा?

कांईं ठा?

मोटा समद तळावां री

ऊंची नै नीची लैरां

किण नै हिचोळै,

किण नै डूबोवै?

कांईं ठा?

कांईं ठा?

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत मई 1983 ,
  • सिरजक : विक्रमसिंघ गुन्दोज ,
  • संपादक : नरपतसिंह सोढ़ा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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