जाग्यो पैली जाग्यो

म्हारै सूं पैली कोई

रोयो रात्यूं—

दुखियो अेक कबीर।

जागूं मैं जागूं

धरती रूपाळी री देही

ओढ्यां तारां छाई रात

अडोळो थारै बिन हद भांत—

धरती छाती थन जाणै अेकलो!

स्रोत
  • पोथी : उतर्‌यो है आभो ,
  • सिरजक : मालचन्द तिवाड़ी ,
  • प्रकाशक : कल्पना प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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