आफत पै आफत वां झेली,

लड़्यौ बराबर पण झुक्यौ।

वो लोगां रै बीच बावळौ

रंग आपणौ जमा चुक्यौ।

कदी बात बिगड़बा दीदी,

वौ धन-दौलत गमा चुक्यौ।

कई हेकड़ीवाळां नै वौ

खूंगाळी ज्यूं नमा चुक्यौ।

अलख जगातौ फर्‌यौ रात दन,

वौ या धूणी रमा चुक्यौ।

पीढ्यां खपगी कमा पाई,

वौ अतरौ जस कमा चुक्यौ।

सीस हथेळी राखै ज्यानै

डोर आपणी थमा चुक्यौ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : जगदीशचन्द्र शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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