थाँ भी अब जोखिम उठाओ म्हारा सजना
अबकै चुनाव लड़ जाओ म्हारा सजना।
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़-तोड़ अर
दिल्ली की गादी पै चढ़ जावो म्हारा सजना।
आंख्या फोड़ घाली थाँनै रात-रात घूमतां
साहित्य का धूपाड़ा में जिंदगाणी हूमताँ
कागज कलम अर आखरां नै चूमतां
गांवा का सरोतां नै झुमातां अर झूमतां
घणां न्हं तो थोड़ा वण जाओ म्हारा सजना।
थां भी देव गोड़ा वण जाओ म्हारा सजना।
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़तोड़॥
कविता-फविता छोड़ मुजरा सुणाओ जी
स्वाभिमान भूल बिरदावळ्यां थां गावो जी
आख-ढोक खा’र थां टिकट मार लावो जी
जीत्या पाछै जनता नै फाकी मार खाओ जी
झंडी आळी कार में बिठाओ म्हारा सजना
माधुरी की फिलम दिखाओ म्हारा सजना।
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़तोड़॥
म्हनै तो सुणी छै नेता चारो चरर्या छै जी
कई तो करोड़ां को गारो करर्या छै जी
गांधी की लंगोटी लेर थां'ई फरर्या छे जी
गांधी जी का बांदरा तिजोर्यां भरर्या छै जी
नोटां की बछावण्या भरावो म्हारा सजना
खाता परदेशा में खुलावो म्हारा सजना
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़तोड़॥
एक लूगड़ी नै कांई धोऊं अर निचोऊं जी
पाव चून पीपा में बताओ कांई पोऊं जी
कद तक ढोला फाट्या टाट पै म्हूं सोऊं जी
लीर-लीर जिन्दगी नै कद तांई रोऊं जी
शारदा को झंझट हटाओ म्हारा सजना
थां भी अब लछमी पटाओ म्हारा सजना
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़तोड़॥
मंतरी बण्यां तो म्हूं भी मेम बण जाऊंगी
ब्यूटी पार्लर पै कटिंग करवाऊंगी
सलमान खान संग फोटो खिंचवाऊंगी
दिल्ली शहर में म्हारो घाघरो घुमाऊगी
म्हानै चील गाड़ी में बिठाओ म्हारा सजना
दुनिया की सैर कराओ म्हारा सजना
कविताई छोड़ करो थोड़ी जोड़तोड़ अर
दिल्ली की गादी पै चढ़ जाओ म्हारा सजना।