ऊजळी बत्तीसी

लम्बा केश

चढतौ जोबन

सुरंगा धार्‌या बेस

रखड़ी मैमद रूड़ा

रूड़ौ टीबी केरौ भळकौ

मुळकै नथड़ी रा मोती

चूड़ी केरौ चळकौ

कांई तो लुकावै? कांई ढकावै?

ढाक्या सूं कद ढकणी

छैल-छबीली री जोबन

छिब ओपमी!

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : विक्रमसिंह गून्दोज ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकासण ,
  • संस्करण : जुलाई 1987
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