जाणता-बूझता टिक्या है–
आपरी धरती सूं कट्या
अमूझता।
पिसीजै;
मरै।
इयां लागै जियां कै स्याई सूख्यां पैन हुवै।
चालैला, पण छिड़ेक्ये सूं।
वा छिड़काण स्याई रै छेड़लै टोपै री भी व्है सकै।
जद टिकैला?
कित्ताक?
टिक सकै;
जे समझै कै अेक टोप में जियो भी जा सकै;
कारण कै आपरी धरती सूं अेक होवण री बात
टोपै रौ उमर सारै माप है।
तो जियो जाणता-बूझता।