म्हैं बूझ्यो-

जात-पांत अर भींटभरांती काळूंस नीं लागै थानै?

उणां कैयो-

विविधता मांय अेकता है अठै।

म्हैं बूझ्यो-

म्हारी जात बूझ्या बिन्या पाणी क्यूं नीं प्यावो थे?

उणां कैयो-

भारत नदियां रो देस है।

म्हैं बूझ्यो-

भाड़ै माथै मकान दैस्यो काईं?

पडूतर मिल्यो-

मंगळ ग्रह माथै जूण री खोज चालू है।

म्हैं सगळा सुवाल पटक न्हांख्या—

अर उणां आपरा सगळा पडुत्तर

जुग बीतग्या

म्हारा सुवाल बठै रा बठै है

जवाब पण कठै नीं है।

स्रोत
  • सिरजक : बी एल पारस ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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