माफ करजै थूं

रातै मैं सौंप दीवी

थारै बोलां री याद

साव अेक अजोगती आवाज नै!

अेड़ो करियां

म्हारी सूनी नाजोगी इण रात

कसार्‌यां रो रांडी रोवणो

हुयग्यो म्हारै सारू—

थारै होठां मधरो गीत!

थारै गीत रै चौफेर

मैं सजायो आर्केस्ट्रा—

दूर बगती रेल री सीटी,

भूंसता गिण्डक ओपरी छायांवां नै,

पूर फाड़ती अेकै-बीजी रा बिलड़्यां,

केई सुर उणियारै बायरा।

इण भांत फेरूं अेक रात

कटगी थारी मैफलां!

स्रोत
  • पोथी : उतर्‌यो है आभो ,
  • सिरजक : मालचन्द तिवाड़ी ,
  • प्रकाशक : कल्पना प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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