धरती मांय कोनी पूरीजै तेल
हेली म्हारी!
जे काढ लियो धरती रो आखो तेल
तो कळपना निस्तै हुवसी
धरती है गट रो नारेळ।
हेली म्हारी!
मज्जा जे निसरैली हाडां मायं सूं तो
गोडा तो देवैला जुवाब
सूख पड़ैली ऊजळी चामड़ी
लुळ पड़ैलो डीघो डील
हेली म्हारी!
धरती मांय कोनीं पूरीजै तेल
रिती हुयां तो काया धूजसी
साथण म्हारी!
मिनख नै संजलो राख
बात बता रे गजबण मांयली!
हेली म्हारी!
धरती है गट रो नारेळ
रिती हुयां तो काया धूजसी
लुळ पड़ैलो डीघो डील!
कीकर रंगीजैला गौरीधण रा होंठ
हेली म्हारी!
होळी खेलै मिनख जीवणराग सूं
बिराणै लगाई मन में आग
भभक उठ्यो है आखो जगतड़
मौत पसरगी आकासां मांय!
सुरंगी नै लीलग्यो विग्यान
रंग बणग्या है चिकना लागणा
पुसप रोवै है गीला हुय
कीकर रंगीजैला गौरी धण रा गाल।
वो ल्यावै इधको काळमस
हेली म्हारी!
हांसी होठां में बैठी ल्हुक
होंठ खुलै तो हांसी बापरै
मुळकणियां होठां नै लिया खोस
जुग जगताई डाकण सांडकी।
हेली म्हारी!
भावज नै हांसी देय'र बुलाय
सैंचनण करदे बींरा गालड़ा
लाली रचादै गजबण ऊपरां
देवरिये ने दे दे लाल गुलाल
सुरंगो कर दे गजबण डील
रंग-रंगीली कर दे अधराजण मांयली।
हेली म्हारी।
जीवण है जग रो आधार
सरस सरजीवण जीवणराग सूं।
सरस बतळाले सोनल मांयली
हेली म्हारी!
थारी मिसरी सोनल अवाज
करलै बातां मिनखां-परेम री
थारो ओळख अलख आकार
सुरतां सत चढे।
हेली म्हारी!
अगन कुंड में म्हारा हाथ
थूं मतना छोड़ीजे गजबण साथ
म्हैं थारो हाळी हूं अधराजण मांयली।
हेली म्हारी!
धरती पर मिनख री सूरत डरावणी
कळपीजै गायड़ काळजो
विणास लगावै भीतर आग
सोनल सुख सुरतां नै साबत राखजे।
हेली म्हारी!
थारै कनै बैठ्यो हूं गोडी ढाल
मीठी बतळालै सुहागण मांयली
यूं है म्हारी भीतर गठजोड़!
हेली म्हारी!
सिस्टी रै सिर पर राखजे हाथ
जीवण राखजे गजबण धरती ऊपरां
म्हैं बावूं मिनखां हेत
यूं सुध बुध दीजे मोबी मिनख नै
म्हैं थारो हाळी हूं।
हेली मिनख नै ऊजळो राख
हेली!
जल सूं नीपजी है मिनख री ऊजळी साख
मिनख पाणी नै मैलो कर रैयो!
हेली म्हारी!
मिनख चालै अपजस री चाल
धरती री सरजीवण सोच गजबण ना रैयो
सुलखणी देखे है ऊभी हुय
मिनख पिछम में रैयो गळ।
हेली म्हारी
मैलो हुसी जे पाणी पीवणो
तो रोग बधसी जग काया मांय
अपवीतर हुज्यासी निरमळ मानखो
मैला हुज्यावैला उजळा भेख।
हेली म्हारी!
जल-जमीं नै निरमल राख
नीं नांव मिट जावैलो उजळी साख रो!
हेली म्हारी!
मिनख नै हेलो देय'र बुलाय
गेलो बता दे गजबण मांयलो।