जगमग कर दे निरमल सांस नैं म्हारी हेली
धरती पर उडै है काळो खंख
काळ गंडकड़ो सामीं आय रैयो!
हेली म्हारी!
मिनख-मिनख री बोली भूल
धरती पर ऊभी करै विध्वंस
काळ दिखावै मरण मारगड़ा!
हेली म्हारी!
मिनख नैं मिनखां रो कोनी सोच
कुबद मचावै जग रो मानखो
समझ बिगड़्योड़ी ऊभी घर रै बांरणै!
हेली म्हारी!
सांसा नै दोरा ई देवै डंक
मौत पकड़’र ल्यावै मानखो
सोच समझ सूं खावै मात!
हैली म्हारी।
सांसा रो दुखड़ो बांच
असमझ सतावै जीवण सांस नै
हेली म्हारी!
बात अणरवणी चाली जगतड़ै
रचग्यो धरती पर अबखो नास
मिनख मिनखरी सुध भूल गियो!
हेली म्हारी!
राता हुया है निरमळ नैण
लोही चुवै आंख्या मांय सूं
जीव जगत में पावै दु:ख
लोही भीतर सूं बहतो जाय
सोच सरजीवणा खोस्यो जगरी गंडकड़ी
हेली म्हारी।
जीवण नैं कोनीं आवै सुवाद मिनखां जूणरो
बे सुवालो ऊभो आखो जग
जुगत जगायो आखो कु ध्यान
साथण म्हारी।
धरती पर उगारी नेपै विकसित असोचरी
मिनख मिनख नै कीकर बांचसी?