हे धरती मां
म्हे थारी गोद में रम्या
थूं म्हानै पाळिया-पोखिया
म्हे पियौ, थारै संचियोड़ौ इमरत जळ
चाख्या थारै निपजायोड़ा फल
ली थारै बिगसायोड़ा फूलों री गंध
कर्या अलेखूं कोड अर उच्छब
लोट्या थारी बेकळू रेत में
मांडिया अणगिण चितराम
पग रौप्या थारै पांण
उभा होवण री जुगत करी
नाचता कूदतां हुया मोट्यार!
म्हानै पाळण रो जतन करतां
थूं झेलिया अलेखूं घाव
थारी कोख व्हैगी बिरछ हीण
सूनी व्हैगी थारी मांग
हुयगौ चीर लीरां-लीर
हांचळां रौ पाणी सूखगौ
पण म्हे नाजोगा पूत थारा
कदैई थारी सुद-बुध नीं ली
नीं देखी थारी कळपती काया
नीं बावड़िया पाछा थनै संभाळण
नी जाण्यो थारो दरद, थारी पीड़
क्यूंकै म्हे हां थारा नुगरा कपूत
हे धरती मां! म्हांनै माफ करजै
कपूत हां पण बेटा थारा हां।