घणौ प्यार करौ छौ

थाँ म्हँईं चाहौ छौ

प्राणाँ सूँ बी ज्यादा

थाँका प्यार को समन्दर

अगस्त्य की नाँईं

एक ही घूँट में

न्हँ पी’र

बूँद-बूँद भर

चाहूँ छूँ चिड़ी की नाँईं

होठाँ की चोंच सूँ पीबौ

फेर भीतर ही भीतर

मथ-मथ के सारौ ज्हैर

रमा लूँ कण्ठ में

अर

सारौ इमरत

चाहूँ छूँ उड़ेलबौ

थाँका होठाँ का आकास में

जीं सूँ थाँ

सारा जंमाना के ताँईं

दे सकौ खुसी का बोल

गा सकौ

परेम का गीत

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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