कारु-कमींणा

त्यूंहार अर

बीरत री हांती

दिन-रात कारज

फेरुं पांती,

म्हारै निबळै

मन मांय

उठै हूक कै

भांग न्हाखू

इण नाजोगी बीरत नै

जिण सूं

होंवतो रैयो है

म्हारो सोसण,

मन मांय आवै

कै सामल्यूं

कुंहाड़ौ अर

न्हाखदूं

घणी खम्मा अर

गिरगिराट री

पोखेड़ी आदत

नीं जणा

भूख सूं तिरवाळा

आंवता रैयसी

ईयां

अर बाजती रैयसी

बंशी बांरै

हियै मांय।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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