पैलोड़ी पच्चीस की, इब वाळी की सांच।

गुड़िया ही बस पांच की, बीं पर आई आंच॥

बीं पर आई आंच, दरिन्दा की शैतानी।

पशुता नैं भी मात, हुई सबनै हैरानी॥

भय कोनी कानून को, डंडा सै बेकार।

दोस नहीं इंसान रो, दोसी है सरकार॥

होळी में न्यूतौ मिल्यौ, गोयल हो महमान।

आयोजन अतिभव्य हो, मिल्यौ घणो सम्मान॥

मिल्यौ घणो सम्मान, जणां गोयल हरखायो।

आती होळी में भी म्हानै, न्यूंत बुलायो॥

बुलवाले भगवान जे, इतणी किरपा कीजौ।

म्हारो नूंतो, सुरग-लोक में भिजवा दीजौ॥

बधता जावै ऊंदरा, नुंवी समस्या आज।

लागै है इब ऊंदरा, करै जगत पर राज॥

करै जगत पर राज, बधी आवै आबादी।

जीणौं कर्‌यो हराम, करै मोटी बरबादी॥

मोटा इतणां होयगा, लड़बा नैं तैयार।

बिल्ली सूं डरपै नहीं, बीं पर असवार॥

फळ मंडी में मिल ग्यो, म्हानै अेक अनार।

बी अनार नै देखकर, होग्या केई बीमार॥

होग्या केई बीमार, समझगा मिली दवाई।

कर अनार री मांग, बारनै लेण लगाई॥

अेक अनार बीमार सौ, कैवत होगी सांच।

कुण नै दे, कुण नै नहीं, म्हारै लागी फांच॥

कांधा माथै चल दियौ, ल्हास हुयौ मोट्यार।

भेळो होगो गांव पण, ले जावै है च्यार॥

ले जावै है च्यार, मुसाणां तक पूगावै।

और चिता में मेल, राख रो ढ़ेर बणावै॥

सबनै जाणै अेक दिन, अन्तर मन में झांक।

जस अपजस रै जायलो, काया होगी खाक॥

अनशन सत्याग्रह हुया, सै झूंठा हथियार।

गांधी के ईं देस में, अब कोनी दरकार॥

अब कोनी दरकार, हाथ में लाठी चावै।

जावैला सब भाग, याद गोरां री आवै॥

शासक वै का वै र‌ह्या, बदळ्यौ है बस रंग।

गांधी का चेला अबै, पी राखी है भांग॥

सतयुग त्रेता युग गयौ, धरम गयौ ईमान।

कळजुग में दुरलभ हुया, इब सांचा इंसान॥

इब सांचा इंसान, निजर कोनी आवै।

जिण नै देखौ, लगा मुखौटो, सामी आवै॥

भीतर सूं कीं और है, बाहर सूं कीं और।

रामराज रो सपन तो, कळजुग लेग्यो चोर॥

रोजीना व्है शेव तो, दाढ़ी मूंछां साफ।

बूढ़ा भी लागै युवा, उमर लागै हाफ॥

उमर लागै हाफ, जणां धोखो खायो।

जद बेटी हाळो, छोरा नै देखण आयो॥

बणनै छोरो जाणकर, पूछण लाग्यो सवाल।

वै बोल्या; म्है बाप हूं, छोरो है ननिहाल॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मनोहरलाल गोयल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-34
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