सत्ता मांय

पख अर विपख

फखत

'उत्तर भीखा म्हारी बारी'

रो खेल है।

पख शेर है

तो विपख नाहर

पैल्यां छळ हो

बां कन्नै अबै

बळ है,

राज है

नाम है

लोगां नै

उण री दरकार है

क्यूं कै बै

अब सरकार है...

विपख

सत्ता री निजर सूं

कूड़ौ है

निकम्मो है

चालबाज अर

विकास माथै

दीवळ है।

विपख

अखबारां मांय

छेड़ राख्यो है

जिहाद।

विरोध करणै सारू

खोल राख्या है

खाता।

शेर खांसै है

नाहर हाँसै है

पख-विपख

फकत नाटक है

'उत्तर भीखा म्हारी बारी री'

उडीक है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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