महिला माता है।
आ तो सृष्टी सूं ही आगी
जद ब्रह्माण्ड रचण नै लागी
इण री काम कळा जस जागी
शक्ति माता है।
सत सिणगार कळा कैलावै
ब्रह्मा विष्णु नै उपजावै
प्रादुर्भूत रुद्र सिर नावै
श्री वे माता है।
सारा मरुद्रणा री माई
किन्नर गन्धर्व जोत जगाई
गरिमा गोद अपसरा आई
दुर्गा माता है।
सारी भोग सामगरी उपजी
चटपट बळकळ चीजां निपजी
विद्या बाणी चेतन चिपजी
सुरसत माता है।
अण्डज, स्वदज उद्भिज सावड़
जंगम प्राणी मानव मावड़
अपरा शक्ति रा है डावड़
पृथ्वी माता है।
जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति सेती
स्थूल सूक्ष्म कारण चेती
बाहर भीतर च्यानण देती
ज्योतिस् माता है।
असंग देश काळ में सोवै
वस्तु व्याप्ति दरसण मोवै
विश्व बीज ऊंकारी बोवै
देवी माता है।
इण रा नांव असंख्य गिणावूं
लिखतो-झिकतो ही मर जावूं
जामण जगती री-गुण गावूं
नारी माता है।
सतियां पूजमाण सिर माथै
वन्दसागर वीरांगण साथै
काळी साहस कुबुध्दि नाथै
सिंघण माता है।