किणी बसंती रात में

म्हैं निकळूं घूमण सारू

अर म्हनै मिळ जावै

भगवान

किसी प्रार्थना उण वगत

म्हारै मूंडै सूं निकळै?

म्हारी प्रार्थना व्है

कै

सुविचारित हिम्मत रा स्वामी!

बसंती रात रा हे स्रस्टा!

कर दो म्हारो हिवड़ौ

इतरो मजबूत

कै

नीं मांगूं म्हैं थां सूं

कदै कोई चीज।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच ,
  • सिरजक : जॉन गोल्सवर्दी ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकाशन, बासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : अक्टूबर-दिसम्बर
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