पाणी री के दास्तां, पाणी रो के नाम

नानक, ईसा या खुदा पाणी है राम।

अम्बर में बादळ बणै जाडै में जम ज्याय

नदियां सूं बैहकर चलै, जळ में जळ मिल ज्याय

मिलै पून कै साथ जे, पड़ै नाम तूफान

महाप्रळय सिरसटी रचै, पाणी को संविधान,

पाणी सारू जिन्दगी, पाणी सारू काम

पाणी की के दास्तां, पाणी को के नाम॥

मूंडै पर पाणी बणै इज्जत रो प्रतीक

पाणी-पाणी सरम सूं नीं होणू ठीक

आंख्या में आंसू बणै, तन में बणर्‌यो खून

पाणी छोडै साथ तो मिलै पून में पून

नाकां सूं पाणी बह्वै, कैर्‌या लोग जुखाम

पाणी की के दास्तां, पाणी को के नाम॥

सिर सूं ऊपर गुजरज्या, बणै मूंछ रो बाळ

दाणो-पाणी उठज्या जै बणज्या भूचाळ

चातक पाड़ै चूंच नै, पिउ-पिउ करर्‌यो मोर

पणिहारी पणघट चली, ज्यूं हुयगी भोर

कोरो घड़ियो देख कैा पथिक करै विश्राम

पाणी की के दास्तां, पाणी को के नाम॥

(इब) पाणी गयो पताळ में पोखर सूक्या जाय

बून्द-बून्द नै सांचरो, कोई नहीं उपाय

गवरमेन्ट बी, रोज री कर री परचार

पाणी को बचाव ई, जीवण रो आधार

जळ चेतना ल्यावणो, ‘दीप’ बतावै काम

पाणी की के दास्तां पाणी को के नाम॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : प्रदीप शर्मा ‘दीप’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
जुड़्योड़ा विसै