रूपाळै रणवासां रूड़ा पौरायत ओ!
गोखां चढ़, झीणोड़ी रेसमा झांकणहार!
थारै रंगमहलां आज, अमूटी कळायणां, केसां री
लटां री लूंबी छै कांठळां
झलोमल झबूकै बैरण कंचन बरणी बीजळ्यां
कजळायी रैणां में
नैणां री दीवटां में
नेहां री जोत जळै!
सांसां री सोरम सूं गमकै छै सीस महल
गालां री मखमली लूंबाळण सेजां पर
अंतर सूं बिगसती आभा री राजकंवर
पोढी छै अेकली, बळखाई बीजळी!
दूधिया चांदी री चोकी पर मेली है
मूंगीया होठां री प्याली में पुरस्योड़ी
झालां दे झलकती अधरां री दारूड़ी
मुळक में बिखरी छै मनवारां मोकळी
मारगियै बहतोड़ै, हिवड़ै बटाऊ रै
ढोलां पै थाप देय, भावां री ढोलणां
तीखोड़ी रागां में मूमल उगेरी है
हालै तो ले चालां मुरधर देस!