ऊंका मन मं कांई डर होगो

नाड़की बारै खाड’र मटक रयो छै

बरसता पाणी मं पेड़ की खोखळ सूं

ईंसूं बढ़िया तो कांई घर होगो।

स्रोत
  • पोथी : आंथ्योई नहीं दिन हाल ,
  • सिरजक : अम्बिकादत्त ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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