म्हैं म्हारो

बो सगळो गमायो

जिणरै होवतां थकां ईं

ही च्यारूं कानी

छायोड़ी अपूरणता।

पण गमायो

तो इण बिसवास सूं गमायो

कै मिलैला जिको कीं

इण सगळा नै गमायनैं

उणसूं आवैला

चौफेर पूरणता।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पारस अरोड़ा ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : सितम्बर
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