नेताजी बीमार पड़्या,
बचणै की आस कोनी।
हाड-पग फाटै हा, अर थोड़ी-सी ही जुरसी।
बीरबानी बोली, ‘थारै, कुणसी दुवाई लागै?’
‘हूं तो ठीक हो ज्याऊं जे।’
मिल ज्यावै कुरसी।