नेताजी बीमार पड़्या,

बचणै की आस कोनी।

हाड-पग फाटै हा, अर थोड़ी-सी ही जुरसी।

बीरबानी बोली, ‘थारै, कुणसी दुवाई लागै?’

‘हूं तो ठीक हो ज्याऊं जे।’

मिल ज्यावै कुरसी।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : तारासिंह ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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