यूं जुमला नीं उछाळो

फिल्मी अदावां सूं

नीं घड़ो नित उठ

नुवां-नुवां सम्बोधन

नीं बांधो पाळ

मेरी झूठी सांची बडायां री

बंद करो मेरै तांई

आवण वाळा झूठा बहाना।

डिगमिगा रही मेरी निष्ठा

डरा रैयो थारो बुण्यो सुपण-जाळ

खोखला उधारी हरफ

ऊंची दुकानां खरीद्‌यां

सोवण-मोवण कार्ड

सुभकामनावां रै नांव

चिलकती पन्नियां

सलीका सूं

सज्या-संवर्‌या उपहार।

थारै हाथां

बार-बार

छलतां-छलतां

हारगी मेरी हिम्मत

इण सै री आड़,

मैं अेक औरत

घणी डरूं’क

फेर छली जाऊं

किणी फरेब सूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हरदान हर्ष ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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