जिण घर सूं बाई री
विदाई व्है
उण घर में हर सिंझ्या
चिरमी रौ गीत बाजै
उण घर में रोज
आस रौ दिवलौ जळै।
उण घर में बाई रौ
लाड
कदैई कम नीं पड़ै,
वो गीत बण’र—
माईतां रै मन में ठै'र जावै।