पथरायोड़ी आंख्यां

चपक्या गालां पै

टंगी लाम्बी सी नाक सूं

बाजती सांसां री सारंगी पै

कतरा नेता : जन सेवक

भासण देय-देय दोवड़ा होग्या

डील पै चढ्योड़ी चरबी सूं

गाल खरबूजा

पेट तरबूजा होग्या

पण आज भी

आम आदमी रा गाल पै, आंख पै

कंईं फरक आयो कोनी

नित-नित आकाशवाणी पै

गरीब का नांव पर चालू कीधी

नूंवी नूंवी योजना

गरीबी हटाओ री घोषणा

सुण-सुण’र कान तो

पैल्यां ही बहराग्या

पण आज भी

गरीब अर गरीबी ज्यूं री ज्यूं है

अबै चोळो बदळ आयगी है

नूंवी आजादी

नूवां नेता जन हेता

बदळ्योड़ा भेस में देस में

वांको रंग कांईं वहै

थे म्हे सब देखां।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : नन्दकिशोर चतुर्वेदी ,
  • संपादक : दीनदयाल औझा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : फरवरी, अंक 12
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