जंगळी व्है जो जरदो खावै, बीड़ी पीवै बावळा।
गेल्या व्है जो गुटको खावै, समझू खावै आँवळा॥
तुलसी पतर नित उठ खावो।
छोड़ो पान परागां नै।
जून जुग री रीत निभावो।
पाग बंधावो जागां नै॥
गेल्या व्है जो गांजो पीवै, मुरदा खावै कांवळा।
जंगळी व्है जो जरदो खावै, बीड़ी पीवै बावळा॥
हूकोपाणी मौत मांदगी।
बातां बूजो भाटां नै।
भांग भूंगड़ा खावै डोफी।
गण्डक खावै आटा नै॥
डाकू व्है जो दारू पीवै, भूत चबावै बाकळा।
जंगली व्है जो जरदो खावै, बीड़ी पीवै बावळा॥
कुदरत री बाली धरती पै।
अमरत री गंगा बेवै॥
आम आमली सेव संतरा।
काजूड़ा सब नै देवै॥
मरदां के तो थाळी बाजै, नामरदां क छाजळा।
जंगळी व्है जो जरदो खावै बीड़ी पीवै बावळा॥
खोटा व्यसन छोड़ना पड़सी।
सौगन लोग लुगायां नै॥
सादो जीवण सुख रो सागर।
कहदो सगळां भायां नै।
हँसी खुसी सू उछब मनावां, नाचै कूदै पांगळा।
जंगली व्है जो जरदो खावै, बीड़ी पीवै बावळा॥