दूक दूक कै क्यूं थारी
पत खोयी
आखिर होयी तो बा ई
जो होणी थी
अती बहसबाजी
करकै के मिल्यो
अरे! कोई पै तो
जी टेक्यो राख्यो होतो
जिका नै थे थारा
आप आळा समझो
बै ही थारी लुटिया
कोनी डुबोवै
ई की के गारंटी है?
अति सी बात तो
ध्यान में राखल्यो
सुख पावोगा।
बेमतलब की स्याणपत करणां में
क्यूं ही आणा-जाणी कोनी।