धरम-खेत कुरु खेत में, विख बरस्यो असराळ।
बिना मौत मार्या गया, बादीला भूपाल॥
धरम-खेत कुरु खेत में, हुयो रगत रो काच।
खांडो अर खप्पर लियां, नाची चंडी मीच॥
धरम-खेत कुरु खेत में, भीखम सा बळवीर।
उतर्या आपो भूलकर, द्रोण जिसा रणधीर॥
धरम-खेत कुरु खेत में, द्रुपद-सुता रो स्राप।
विख-फळ ज्यूं परगट हुयो, आरज-कुळ संताप॥
धरम-खेत कुरु खेत में, दुरजोधन रो पाप।
पुन्न साथ ले डूबगो, लार छोड संताप॥
धरम-खेत कुरु खेत में, कटगो पाप जरूर।
पुन्न खड़्यो पण नां रह्यो, पगां पांण मजबूर॥
धरम-खेत कुरु खेत में, हुई धरम री हाण।
खिंडतो देख्यो आप हरि, छत्री-कुळ कमठाण॥
धरम-खेत कुरु खेत में, परळै उतरी आय।
रोक न पाया आप हरि, अहळा गया उपाय॥
धरम-खेत कुरु खेत में, हार हरि गया आप।
टाळ सक्या नां जतन कर, भारत रो संताप॥
धरम-खेत कुरु खेत में, अनरथ हुयो महान।
बण्या आप हरि सारथी, होणहार बळवान॥
धरम-खेत कुरु खेत री, लिखी व्यास मुनि ख्यात।
बण्यो महाभारत विमळ, विश्वकोश विख्यात॥