ख्यात साहित्यकार। संपादक रूप ठावी ओळखाण। 'रोहिड़े रा फूल' चावी पोथी।
बीज
धरम खेत कुरु खेत
हंस अर कोचरी
पीढ़ी-पीढ़ी रो फरक
सार कमाई
तूं जाग जाग ओ मिनख जाग