सरकार!

आया हो थे

सरे आम

कत्लेआम रै बाद

ईजत-आबरू लूंटण रै बाद

बांध टूट’र

पाणी में डूबण रै बाद

लागै–

थारी तो देख-रेख है

म्हारी जो रेख है

बा तो

अब भी राम भरोसै है!

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : निशान्त ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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