1
आंख्यां सूं आंसूं ढळै, आंख्यां ढळै हुलास।
आंख्यां मन रो आईनो, आंख्यां मन रै पास॥
2
कदै जरा सी बात पर, हो ज्यावै है लाल।
आंख्यां मे दीखै कदै, उठता कई सवाल॥
3
गिरता देख्या आंख सूं, साधु और सैतान।
सबकी आंख्यां में बसै, कुछ बिरला इन्सान॥
4
चोर, जुआरी, निकम्मू, बदसूरत, बद चाल।
आंख्यां रो तारो मगर, हर जननी रो लाल॥
5
आंख्यां नै ही देन है, कुदरत री सौगात।
भर्या भवन में भी ‘सजल’, कर लेवै है बात॥
6
आंख मिलाबा को कठै, देवै है संजोग।
आंख बचाकर निकळ ले, सभी मतलबी लोग॥
7
होता कुछ रै रूबरू, आंख चुरावै लोग।
किसी किसी री राह में, आंख बिछावै लोग॥
8
जो हा अर्ध विराम बै, होगा पूर्ण विराम।
आंख्यां का अंधा कई, मगर नयनसुख नाम॥
9
आंख्यां, अस्कां रो रह्यो, सदा-सदा रो साथ।
ज्यूं चंदा रै साथ में चलै चांदनी रात॥
10
सबनै अै अनभव ‘सजल’, होवै देर सवेर।
बुरा बगत में दोस्त भी लेवै आंख्यां फेर॥