अणचक उलट दीनी

आपणी दिस पवन अर बिरखा;

आपस में फेरूं गुत्थमगुत्था।

वजरघात बादळ बरसावै

धरती माथै कितरा दुखड़ा?

बै फेरूं देख रह्या है

आपणा सोनल कोदू-सपना।

थिङ नदी नै रोजीना डाक

लाल धजा बढती जावै

लुङयेन अर शाङ्गहाङ्ग तांई।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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