जिण घर सूं बाई री

विदाई व्है

उण घर में हर सिंझ्या

चिरमी रौ गीत बाजै

जिण घर सूं बाई री

विदाई व्है

उण घर में रोज

आस रौ दिवलौ जळै।

उण घर में बाई रौ

लाड

कदैई कम नीं पड़ै,

वो गीत बण’र—

माईतां रै मन में ठै'र जावै।

स्रोत
  • पोथी : सुवालड़ी (राजस्थानी कविता संग्रै) ,
  • सिरजक : प्रमिला शंकर ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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