बादळ तांई पूगण रौ म्हैं तौ

घणां दिनां सूं हूं अरदासी

अर आज चिङ्गकाङ्ग शान माथै चढ़तौ

अपणा जाणीता अर पुराणा

इण मुकाम नै फेरूं देखूं

इणी हेत म्हैं घणी दूर सूं

जात्रा कर'नै पूगौ हूं।

देखूं हूं कै पलट गया है

नुवा दरस में दरस पुराणा।

अठी-उठी सोनल पंखेरू

चहक रह्या गावै है गाणा

उडै अबाबील तीर तराटै

जळ-झरणा री कळकळ वाजब

अर आभैमुंडै मारगियौ

दूर तलक चढ़तौ जावै।

अेक बारगी जै हवाङ्गयाङ्ग च्ये नै पार कर्‌यौ

तौ पछै निजर जोग कोई

दुगमी ठौड़ नीं रह जावै।

आंधी-बीजळ मचळ रह्या है

धजापताका फहरावै

जठै-कठै भी जन-जीवण है।

बीत्या अड़तीस बरस अे

जाणै चुटकियां बजावंता।

नुंवा गिगन रा ऊंड आंक में

पूग चांद नै तोड़ सका म्हैं।

डबक पांच दरिया रै तळ में

काछब टोळी नै

पकड़ बांध लावण में पूरा;

आंवाला म्है हँसता-हँसता,

विजय गीतड़ा मिळजुळ गाता।

इण जगती में कठण कीं नीं

जे म्है ऊंचा डूंगर माथै

चढ़वा रौ मन-संकळप साधां।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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