म्हनै ईसकौ है

अर भेद

म्हैं छिपायो कोनी।

म्हनै ठा है—

कठैई रैवै अेक टाबर

जिणसूं म्हनै ईसको है—

क्यूं के बो झगड़ाखोर है

म्हैं नीं हो कदैई

इत्तौ सैज, हिम्मती।

म्हनै ईसकौ है

उणरी हंसी माथै—

म्हैं नीं हंस्यौ यूं टाबरपणै में

बो चींथरां में राजी हुयोड़ौ घूमै।

म्हैं रईसी में पळ्यौ

जिकौ नीं बांच सक्यौ म्हैं

पोथ्यां में—

वौ उणनै जरूर बांचैला

इणमें वौ म्हारै सूं बधगौ।

वौ हुवैला सांचौ अर साफ दिल

चोखापै रै सारू भूंडापै नै

कदैई माफ नीं करैला

अर जठै म्हारी कलम

अटकै—

“फालतू है!”

वौ कैवैला—

“फालतू कठै....?”

अर कलम उठावैला

सुळझावैला

नीं हुयौ तौ काट देवैला

अर म्हैं

नीं सुळझावूंला, नीं काटूंला।

वो चावैला तौ अेक वार

म्हैं लाड (?) करूंला

अर बारंबार

ईसकै नै छिपाऊंला

मुळकूंला

अर जाणूंला, जाणै कीं नीं जाणूं

सीधौ हूं।

“कुण गलती नीं करै

किणसूं चूक नीं हुवै....!”

खुद नै समझाऊं

बारंबार दोवड़ाऊं—

“हरेक रौ आपरौ भाग है।”

पण भूल नीं सकूं

कठैई है अेक टाबर

जरूर प्राप्ती करैला वत्ती

म्हारै सूं वत्ती।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : येवजेनी येवतुरोंको ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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